भारत में अंगुली चिन्ह

कार्यकारी सारांश

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (रा.अ.रि.ब्यूरो) के तहत ‘भारत में अंगुलि छाप-2018' केन्द्रीय अंगुलि छाप ब्यूरो (के.अ.छा.ब्यूरो) का 22 वाँ वार्षिक प्रकाशन है। जो केन्द्रीय एवं राज्य / केन्द्र शासित प्रदेशों के अंगुलि छाप ब्यूरो (राज्यअ.छा.ब्यूरो) की वर्ष 2018 की वार्षिक निष्पादन रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। इसमे ब्यूरो की गतिविधियों, उपलब्धियों, डाटाबेस की स्थिति एवं प्रशिक्षण की जानकारी संजोयी की गई हैं। इसके साथ साथ अन्य उपयोगी जानकारी जैसे–प्रासंगिक कानून, उपकरण और आधिकारिक पुस्तकें आदि एजेंसियों, जो एक नज़र में देश भर के अंगुलि छाप विशेषज्ञों, पाठकों और हितधारकों को नई जानकारी से देने में सक्षम हैं।

अध्याय 01- केन्द्रीय अंगुली छाप ब्यूरो की गतिविधियां

के.अ.छा.ब्यूरो, वर्ष 2018 में, राष्ट्रीयक्रत बैंक, भर्ती एजेंसियों, बीमा कंपनियों से प्राप्त 136 दस्तावेज़ मामले व विभिन्न राज्य / संघ राज्य अ.छा.ब्यूरो से प्राप्त 529 चांस प्रिंटों का परीक्षण करके परिणाम देने में सक्षम रहा है। ब्यूरो ने 11.23 प्रतिशत सर्च स्लिप ट्रेस प्राप्त करने में भी सफलता हासिल की है। ब्यूरो ने XIX वें अ.छा.ब्यूरो के निदेशकों के वार्षिक सम्मेलन को एमसीआर-एचआरडी संस्थान हैदराबाद, तेलंगानामें 21 एवं 22 जून, 2018 को सफलतापूर्वक आयोजित किया था । इसमे विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 98 प्रतिनिधियो ने भाग लिया।

ब्यूरो ने अखिल भारतीय बोर्ड परीक्षा (अ॰भा॰बो॰प॰) -2018 का आयोजन भी करवाया। यह प्रतियोगिता 02-05 फरवरी,2019 को विभिन्न राज्यो एवं केंद्र शासित प्रदेशों में अंगुली छाप का काम करने वाले व्यक्तियों को अंगुलि छाप विशेषज्ञ के रूप में मान्यता देने के लिए आयोजित की गयी। अ॰भा॰बो॰प॰ -2018, में 112 योग्य उम्मीदवारो के नामांकन प्राप्त हुए इनमे से 104 उम्मीदवारो ने भाग लिया और 94 उम्मीदवार उत्तीण हुए। अ॰भा॰बो॰प॰-2018 का उत्तीण प्रतिशत 90.4% रहा। पहला स्थान पर अ.छा.ब्यूरो केरल से श्री रजनी राज वी आर रहे।

कई सालों के अथक प्रयासों और इंतज़ार के बाद, राष्ट्रीय स्वचालित अंगुली छाप पहचान प्रणाली (रा॰स्व॰अं॰छा॰प॰प्र॰) के प्रापण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। के.अ.छा.ब्यूरो के विशेषज्ञों द्वारा नाफीस के लिए बनाये गये प्रस्ताव का निवेदन,गृह मंत्रालय की ओर से अनुमोदित किया जा चुका है। भारतीय पुलिस को एक विश्वस्तरीय स्वचालित अंगुली छाप पहचान प्रणाली दिलाने के लिए एक प्रस्ताव मंगाया गया है। नाफीस का उद्देश्य ,विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध अपराध एवं अपराधियों के अंगुली छाप डेटाबेस का एक केंद्रीय कोष बनाना तथा एक राष्ट्रीय स्तर की एक खोज योग्य जानकारी भंडार बनाना है।

जुलाई ,2018 में मौजूदा “कैदियों की पहचान अधिनियम”-1920 (आईपीए) को संशोधित करने के लिए के.अ.छा.ब्यूरो- रा.अ.छा.ब्यूरो द्वारा एक विस्तृत प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा गया गृह मंत्रालय में बैठकें हुईं और कानून मंत्रालय की राय ली गई। इस अधिनियम में संशोधन के बाद गिरफ्तार व्यक्तियों / दोषियों की पर्चियों में वृद्धि होने की संभावना है,जिससे राष्ट्रीय डेटाबेस में भी बढ़ोतरी होगी। कुछ प्रस्तावित प्रमुख संशोधन जैसे- शीर्षक का परिवर्तन ‘गिरफ्तार और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान अधिनियम’ बनाया जाए; हथेली की छाप, आवाज के नमूने,आइरिस स्कैन, डीएनए टाइपिंग जैसे उन्नत बायोमैट्रिक्स का समावेश;अनिवार्य एक (01) वर्ष की कठोर अनिवार्य कारावास की धारा का निष्कासन,किशोरों की माप लेने का आदेश देने के लिए मजिस्ट्रेट को अधिकार, आदि के अलावा और भी कई संशोधन प्रस्तावित है।

नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के मार्गदर्शन में एक स्वायत्त निकाय है। इसका उद्देश्य देश में प्रयोगशालाओं के परीक्षण और अंशांकन को मान्यता प्रदान करना है। फिंगर प्रिंट ब्यूरो में एक सुव्यवस्थित संचालन / कार्य प्रवाह के लिए, एनसीआरबी ने डायरेक्टर्स (फिंगर प्रिंट ब्यूरो) सम्मेलन 2018 में निर्णय के एक बिंदु के अनुसार एजेंसी द्वारा मान्यता प्राप्त करने के लिए प्रयास किया है।

अध्याय-02 राज्य अंगुलि छाप ब्यूरो की गतिविधियां

अंगुली छाप विशेषज्ञों की मुख्य ज़िम्मेदारी अपराधियों द्वारा मौके पर छोड़े गए अंगुलि छाप को विकसित करना और मौजूदा अपराधियों के अंगुलि छाप का मिलान करना है। इसके साथ ही अंगुली छाप विशेषज्ञ अंगुली छाप पर्चियों को भी प्राप्त करते हैं ,जिससे गिरफ्तार व्यक्तियों का पिछला आपराधिक इतिहास पता चल सके। अंगुली छाप ब्यूरो में आने वाले संदेहपूर्ण दस्तावेज़ो पर अंगुली छाप विशेषज्ञ राय देते है। कुल मामलों की संख्या ज़्यादा होने के कारण संवेदनशीलता के आधार पर, खोई हुई। बरामद संपत्ति का मूल्य, मामलों की श्रृंखला का पता लगाना, आदि मापदंडों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक राज्यों द्वारा कुछ महत्वपूर्ण मामले ही इस प्रकाशन में मुद्रण के लिए भेजे गए है।

वर्ष 2018 में ,राज्य अ.छा.ब्यूरो के विशेषज्ञों ने कुल 36,627 अपराध स्थलों का दौरा किया और 40,111 मौके पर मिलने वाले अंगुलि छापों को सफलतापूर्वक विकसित किया। केन्द्रीय अंगुलि छाप ब्यूरो की वार्षिक रिपोर्ट के लिए राज्य अंगुलि छाप ब्यूरो ने अंगुलि छाप से हल किये 144 महत्वपूर्ण मामले प्रकाशन हेतु भेजे। इनमें से 63 मामलों को इस प्रकाशन में जगह दी गयी जिसमें हत्या, चोरी, डकैती, डकैती, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले शामिल थे।

अध्याय- III- केन्द्रीय अंगुलि छाप ब्यूरो एवं राज्य अंगुली छाप ब्यूरो की आदान-प्रदान गतिविधियाँ

इस अध्याय में राज्यों की गतिविधियाँ जैसे- दोषी और गिरफ्तार व्यक्तियों की अंगुली छाप पर्चीयों की प्राप्त संख्या, उनका स्वीकरण और नामांकन, अपराध दृश्यों की संख्या, मौके पर मिलने वाले अ.छा. का विकास एवं तुलना करना, दस्तावे ज मामलों की कुल संख्या और राय शामिल है। केन्द्रीय अंगुली छाप ब्यूरो को देश भर से 41,814 मामले रिकॉर्ड के लिए तथा 46,311 मामले, केन्द्रीय डेटाबेस में खोजने हेतु प्राप्त हुए। वर्ष 2018 में, राज्य अंगुलि छाप ब्यूरो को विभिन्न जिलों एवं पुलिस स्टेशनों से कुल 79,604 अंगुलि छाप अभिलेख पर्चियाँ (रेकॉर्ड स्लिप) प्राप्त हुई।इसके अलावा,राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 6,26,350 अंगुली छाप पर्चियाँ डेटा-बेस में खोज करने के लिए उपयुक्त पाये गए। राज्य अंगुली छाप ब्यूरो ने कुल 1,884 दस्तावेज़ मामले प्राप्त किये ,जिनमे से 1,763 मामलों की अ॰छा॰ विशेषज्ञों द्वारा जांच की गयी। अ॰छा॰ विशेषज्ञों ने 342 मामलो को न्यायालयों में सत्यापित किया। मौके पर मिलने वाली अंगुली छाप को विकसित करने के मामले में , केरल राज्य ने 12,548 छापों को विकसित करके पहला स्थान ग्रहण किया है। इसके बाद 9,971 छापों को विकसित करके आंध्र प्रदेश दूसरे स्थान पर है। इसके साथ ही मौके पर मिलने वाले अंगुली छाप की पहचान करके,आंध्र प्रदेश ने 553 मामले सुलझाए एवं देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। दस्तावेज़ मामलों में,तमिलनाडु ने 320 मामले सुलझाकर प्रथम स्थान पाया। निम्नलिखित तालिका 2018 के दौरान राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में अखिल भारतीय अंगुलि छाप के आदान-प्रदान के आंकड़े दिखाती है ।

राज्य अंगुली छाप ब्यूरो की आदान-प्रदान गतिविधियाँ

  अपराधियों की अ॰छा॰ पर्ची प्राप्त गिरफ़्तार व्यक्तीयों की ली अ॰छा॰ पर्ची प्राप्त मौके पर मिलने वाली अंगुलि छाप का विकास स्वीकृत दस्तावेज मामले
कुल 79,604 6,26,350 61,743 1884

 

अध्याय- IV-अंगुलि छाप की आदान-प्रदान गतिविधियों का विश्लेषण

इस अध्याय में विभिन्न अंगुलि छाप संबंधित आदान-प्रदान गतिविधियों का राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में विश्लेषण दिया गया है। वार्षिक सांख्यिकी रिपोर्ट फॉर्म 2018 में व्यापक बदलाव किए गए हैं, जिसके कारण कई अपराध विशिष्ट प्रमुखों और उप-प्रमुखों को जोड़ा गया है। वार्षिक सांख्यिकी रिपोर्ट फॉर्म 2018 के इस संशोधन ने, राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों से अपराध विशिष्ट जानकारी एकत्र करने में सुविधा प्रदान की है।

तमिलनाडु, पंजाब,और आंध्र प्रदेश राज्यों ने बड़ी संख्या में दस्तावेज़ मामलों की जांच की है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब और तेलंगाना जैसे राज्यों ने सबसे अधिक गिरफ्तारी पर्ची दर्ज की हैं। हत्या, गंभीर चोट, बलात्संग और हत्या के प्रयास के लिए दोषी पाए जाने वालों के रिकॉर्ड की संख्या अन्य भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) प्रमुखों की तुलना में सबसे अधिक है, जबकि दर्ज की गई पर्ची भी अपराधों जैसे- अपहरण, व्यपहरण एवं महिलाओं पर हमलों में अत्यधिक हमलों की तेजी की वृद्धि प्रदर्शित करती है। चोरी की वारदात के लिए गिरफ्तार और दोषी ठहराए गए व्यक्तियों की संख्या डकैती, चोरी और डकैती में शामिल लोगों की तुलना में अधिक है। एन.डी.पी.एस.के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्तियों की संख्या अन्य एस. एल.एल. अपराधों के बाद दूसरे स्थान पर आती है। मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान राज्यों ने सबसे अधिक अभिलेख पर्चियाँ (रिकॉर्ड स्लिप) प्राप्त की।

अध्याय- V- क्षमता निर्माण

इस अध्याय में क्षमता निर्माण और कैलेंडर वर्ष के दौरान आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबंधित जानकारी शामिल है। के॰अ.छा.ब्यूरो/रा॰अ॰रि॰ब्यू॰ भारत के साथ-साथ विदेशी पुलिस अधिकारियों/ कर्मचारियों के लिए कई प्रशिक्षण / रिफ्रेशर पाठ्यक्रम आयोजित करता है।

 

    (क). कुल संख्या

 (ख). कुल संख्या

के॰अं॰छा॰ब्यूरो में प्रशिक्षित विदेशी अधिकारी

के॰अं॰छा॰ब्यूरो में प्रशिक्षित स्वदेशी अधिकारी

रा॰अं॰छा॰ब्यूरो में प्रशिक्षित हुए अपने अधिकारी/कर्मचारी

रा॰अं॰छा॰ब्यूरो में प्रशिक्षित हुए

के॰अं॰छा॰ब्यू॰, नई दिल्ली के॰अं॰छा॰ब्यू॰, कोलकता
कुल 25 99 17 87 21,382

 

अनुलग्नक:

अंगुलि छाप विज्ञान के पुरोधाओं जैसी उपयोगी जानकारी, भारत में फिंगर प्रिंट से संबंधित कानून, XIX अखिल भारतीय अंगुलि छाप निदेशक सम्मेलन की अनुशंसा, विभिन्न फिंगर प्रिंट ब्यूरो में तैनात स्टाफ, नाफीस की का, प्रत्येक राज्य /केंद्र शाषित प्रदेशों में विभिन्न प्रकार के उपकरणों की उपलब्धता, अखिल भारतीय बोर्ड परीक्षा में अव्वल रहने वाले व्यक्तियों की सूची, अंगुलि छाप विज्ञान पर मानक पुस्तकें, रा॰अं॰छा॰ब्यूरो के संपर्क विवरण आदि प्रकाशन के अनुलग्नक भाग में शामिल हैं।


Updated On: 24/09/2020
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