निदेशक का संदेश

Director राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की स्थापना टंडन समिति, राष्ट्रीय पुलिस कमीशन (1977-1981) तथा गृह-मंत्रालय के टास्क फोर्स की सिफ़ारिश के आधार पर, अपराध और अपराधियों की सूचना के संग्रह एवं रख-रखाव (Repository) के रूप में कार्य करने हेतु 1986 में की गई थी जिससे कि अपराध को अपराधियों से जोड़ने में सहायता मिल सके।

तदनुसार, वर्ष 2009 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो को अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (सीसीटीएनएस) परियोजना की मॉनिटरिंग, समन्वय तथा कार्यान्वयन की ज़िम्मेदारी सौंपी गई।  देश में यह परियोजना लगभग 15000 पुलिस स्टेशनों तथा देश के 6000 उच्च कार्यालयों को जोड़ती है।

ब्‍यूरो ने सीसीटीएनएस परियोजना के तहत नेशनल डिजिटल पुलिस पोर्टल को दिनांक 21.08.2017 को आरंभ किया था। यह मास्टर पुलिस पोर्टल है जो नागरिकों के साथ-साथ पुलिस कर्मियों की आवश्यकताओं को भी पूरा करता है। इससे पुलिस कर्मी सीसीटीएनएस डेटाबेस से  अपराधी / संदिग्ध की तलाश कर सकते हैं।  इसके अलावा  क्राइ-मैक, एनडीएसओ, साइ ट्रेन इत्यादि जैसी कई अन्य पुलिस उपयोगी साइटों का उपयोग किया जा सकता है। नागरिकों को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने तथा किरायेदारों, घरेलू नौकर, ड्राइवर आदि के पूर्ववृत्त को सत्यापित करने जैसी विभिन्न सेवायें भी इसी पोर्टल के माध्‍यम से उपलब्‍ध हैं। खोये हुये व्यक्तियों की तलाश, पुराने वाहनों की खरीद के अनापत्ति प्रमाण-पत्र तथा घोषित अपराधियों पर सूचना जैसी नई केन्‍द्रीय नागरिक सेवायें  भी इसी पोर्टल से ली जा सकती हैं।

ब्यूरो को यौन अपराधियों के राष्ट्रीय डाटाबेस (एनडीएसओ) की देख-रेख तथा इसे नियमित रूप से राज्यों/संघ प्रदेशों से साझा करने की ज़िम्मेदारी भी सौंपी गई है। ‘ऑनलाइन साइबर अपराध सूचना पोर्टल’ की तकनीकी एवं परिचालन प्रक्रिया की देख-रेख के लिए भी ब्यूरो को नामित किया गया है जिसके माध्यम से कोई भी नागरिक बच्चों से संबन्धित अश्लील बातें, बलात्संग, सामूहिक बलात्संग की शिकायत दर्ज कर सकता है एवं साक्ष्य के तौर पर विडियो क्लिप अपलोड कर सकता है। ब्यूरो ने साइबरक्राइम जांच तथा अभियोजन में विभिन्न हितधारकों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण पोर्टल साईट्रेन की भी शुरूवात की है।

ब्‍यूरो जाली मुद्रा की सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली (FICN) तथा आतंकवाद पर इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग एप्लीकेशन का भी रखरखाव करता है।

महानिदेशकों/महानिरीक्षकों-2018 के सम्मेलन की सिफ़ारिशों के अनुसार अपराध और अपराधियों की सूचना को साझा करने के बारे में एलर्ट भेजने तथा इंटर एजेंसी/इकाई समन्वय के लिए ई-मेल/एसएमएस आधारित संचार मॉड्यूल प्रदान करने के लिए इस वर्ष ब्‍यूरो ने  क्राइ-मैक (अपराध-मल्टी एजेंसी सेंटर) नामक आईटी टूल को आरंभ कर दिया है ।

ब्‍यूरो ‘क्राइम इन इंडिया’, दुर्घटनात्‍मक मृत्यु तथा आत्महत्या’ एवं ‘जेल सांख्यिकी’ जैसी सूचनाओं का संकलन तथा प्रकाशन भी करता है। इन प्रकाशनों का नीति निर्धारकों, पुलिस, अपराधविदों, शोधकर्ताओं तथा मीडिया द्वारा न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी मुख्य संदर्भ के रूप में प्रयोग होता है। इसी संदर्भ में ब्यूरो को 1953 से सरकारी पोर्टल पर अपराध सांख्यिकी अपलोड करने के लिए भारत सरकार की ओर से ओपन डाटा चैम्पियनशिप श्रेणी के तहत डिजिटल इंडिया अवार्ड्स 2016 के दौरान सिल्वर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

केंद्रीय अंगुलि छाप ब्यूरो देश के अपराधियों के अंगुलि चिन्हों का राष्ट्रीय संग्राहक है जिसमें सजायाफ्ता और गिरफ्तार दोनों तरह के अपराधियों का दस लाख से भी अधिक दस अंकीय फिंगर प्रिंट डाटा बेस है तथा यह फिंगर प्रिंट पर सर्च की सुविधा प्रदान करता है। वर्ष के अंत में, इसे नाफिस (NAFIS) नामक परियोजना में अपग्रेड करने का प्रस्ताव है जिससे कि सभी राज्य एनसीआरबी को सीधे ही ऑनलाइन फिंगरप्रिंट संबंधी जानकारी भेजने/ढूंढने में समर्थ होंगे।

       इसके अलावा, एनसीआरबी ‘भारत में अंगुलि छाप’ प्रतिवर्ष प्रकाशित करता है और सभी राज्यों के अंगुलि छाप ब्यूरो के निदेशकों का वार्षिक सम्मेलन आयोजित करता है ताकि पुलिस जांच में अंगुलि छाप विज्ञान के उपयोग से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श किया जा सके। ब्यूरो दिल्ली एवं कोलकाता स्थित प्रशिक्षण केन्द्रों तथा हैदराबाद, गांधीनगर, लखनऊ तथा कोलकाता स्थित चार क्षेत्रीय पुलिस कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्रों के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी, सीसीटीएनएस, फिंगरप्रिंट, नेटवर्क सुरक्षा  तथा डिजिटल फोरेंसिक के क्षेत्र में क्षमता विकसित करने में भी विभिन्न राज्यों की सहायता करता है।

ब्यूरो महिपालपुर स्थित अपने नए परिसर में स्‍थित है जिसका उद्घाटन माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा दिनांक 08 सितंबर, 2017 को किया गया था।

एनसीआरबी ने भविष्य का रोड मैप एवं कार्य योजना तैयार की है:-

1. सी.सी.टी.एन.एस. फेस – II:

  1. सीसीटीएनएस में राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (नाफ़िस) और एड्वान्स फेशियल रिकगनिश सिस्टम (एएफआरएस) जैसे विशेषीकृत समाधानों के लिंक तैयार करना। सीसीटीएनएस को सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, गृह मंत्रालय के शस्त्र लाइसेन्स, विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट, भारत सरकार के आईवीएफ़आरटी (IVRFT) तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के ट्रैक चाइल्ड से आपस में जोड़ना।
  2. सभी पुलिस थानों, उच्च कार्यालयों, राष्ट्रीय डाटा सेंटर, राजकीय डाटा सेंटर तथा आपदा रिकवरी केन्द्र (DRC) के हार्डवेयर की आधारभूत संरचना को उन्नत बनाना।
  3. प्राथिमिकी दर्ज करने वाली सीमा शुल्क, वन, परिवहन, के.अं.छा.ब्यूरो,  स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय जैसी सभी इकाइयों को, जो कि सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट से नहीं जुड़े हैं, आपस में जोड़ना।
  4. पुलिस थानों में भारतनेट/राष्ट्रीय फाइबर ऑप्टिकल नेटवर्क (NOFN) या अन्य सेवा के माध्यम से मजबूत नेटवर्क कनेक्टिविटी की स्थापना करना।
  5. तीव्र सर्च एवं प्रयोक्ता हितैषी इंटरफ़ेस के माध्यम से सीसीटीएनएस एप्लीकेशन को और अधिक उन्नत बनाना।

2.आईसीजेएस: इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के संचालन में माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ई-समिति की अगुआई में आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न स्तंभों के बीच ऑनलाइन डेटा के आदान-प्रदान हेतु चलाई गई परियोजना की, एक नोडल एजेंसी के रूप में, सहायता करना।

3.अपराध डाटा विश्लेषण एवं प्रीडिक्‍टिव पुलिसिंग के लिए तैयारी करना ।

4. बन्‍दी शिनाख्‍त अधिनियम, 1920 में कानूनी संशोधन के द्वारा गिरफ्तार/ दोषसिद्ध व्यक्तियों के बायोमैट्रिक्स लेने के लिए सशक्त प्रावधान किया जाना।   

ब्यूरो ने पारस्परिक हित के लिए छात्र प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किया है। यह विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं, गैर सरकारी संगठनों और जनता के साथ साझेदारी को बढ़ावा के देने के लिए भी तत्पर है। यदि  आपके कोई सुझाव हों तो उनका स्वागत है जिन्हें ईमेल आईडी:director[at]ncrb[dot]nic[dot]in पर भेजा जा सकता है।

जय हिन्द !
निदेशक


Updated On: 16/09/2020
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