भारत में अंगुली चिन्ह


सारांश

'भारत में अंगुलि छाप -2016' केन्द्रीय अंगुलि छाप ब्यूरो (के.अ.छा.ब्यूरो) का वार्षिक प्रकाशन है जो राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड् ब्यूरो (रा.अ.छा.ब्यूरो) के तहत केन्द्रीय एवं राज्य / केन्द्रशासित प्रदेशों के अंगुलि छाप ब्यूरो (राज्य अ.छा.ब्यूरो) की वार्षिक निष्पादन रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। इसमें ब्यूरो की गतिविधियों, उपलब्धियों, डेटाबेस की स्थिति एवं प्रशिक्षण के साथ-साथ अन्य उपयोगी जानकारी जैसे प्रासंगिक कानून, उपकरण, और आधिकारिक पुस्तकें जो एक नज़र में देश भर के अंगुलि छाप विशेषज्ञों, पाठकों और हितधारकों को नई जानकारी से खुद को लैस करने के लिए सक्षम हैं, शामिल की गई हैं ।

अध्याय- I- केन्द्रीय अंगुलि छाप ब्यूरो की गतिविधियां

वर्ष 2016 में, इंटरपोल ,राष्ट्रीयकृत बैंक, भर्ती एजेंसियों, बीमा कंपनियां और विभिन्न राज्य / संघ राज्य अ.छा.ब्यूरो से प्राप्त 07 मामलों को हल करने में सहायता करके के.अ.छा.ब्यूरो वांछित मानकों को वितरित करने में सक्षम रहा है। ब्यूरो ने 15.4 प्रतिशत खोज पर्ची ट्रेस प्राप्त करने के साथ ही 121 दस्तावेज़ मामलों का परीक्षण करने में सफलता हासिल की है। ब्यूरो राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में राज्य अ.छा.ब्यूरो के निदेशकों के वार्षिक सम्मेलन को आयोजित करने के लिए भी तत्पर है। अभी हाल ही में इसका 14 वां कार्यक्रम भोपाल, मध्य प्रदेश में 02-03 फरवरी, 2016 को आयोजित किया गया था जहां पर पूरे देश से 94 प्रतिनिधि आए थे । ब्यूरो ने आने वाले उम्मीदवारों को अंगुलि छाप विशेषज्ञ के रूप में मान्यता देने के लिए अखिल भारतीय बोर्ड परीक्षा आयोजित की। हाल ही में 19 -22 नवंबर, 2016 के दौरान परीक्षा में सफल होने पर प्रतियोगियों को अंगुलि छाप विशेषज्ञ की उपाधि दी गयी। 2016 में 69 मे से 97% उम्मीदवारों ने सफलतापूर्वक परीक्षा उत्तीर्ण की और सुश्री रुची रघुवंशी, राज्य अ.छा.ब्यूरो भोपाल ने पहला स्थान प्राप्त किया। 19-24 दिसंबर, 2016 को कर्नाटक के मैसूर में आयोजित 60 वें एआईपीडीएम के दौरान ब्यूरो ने अंगुलि छाप प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसमें कुल 114 उम्मीदवारों ने अंगुलि छाप विज्ञान के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं में अपनी उत्कृष्टता प्रदर्शित की।

अध्याय -II- राज्य अंगुलि छाप ब्यूरो की गतिविधियां

अंगुलि छाप विशेषज्ञ की मुख्य जिम्मेदारी अपराधियों द्वारा मौके पर छोड़े गए अंगुलि छाप को विकसित करना और मौजूदा अपराधियों के अंगुलि छाप से मेल करना है। 2016 के दौरान, अंगुलि छाप विशेषज्ञों ने 54,349 अपराध दृश्यों का दौरा किया और 19,450 मामलों में मौके से मिलने वाले अंगुलि छाप विकसित करके 4,723 चिन्हित छापों की पहचान मे सफल हुए । इसके अलावा, अंगुलि छाप विशेषज्ञों को भी गिरफ्तार व्यक्तियो की अंगुलि छाप पर्ची मिलती है जिसका इस्तेमाल अंगुलि छाप की तुलना करके पिछले आपराधिक इतिहास उपलब्ध कराने के लिए होता है। ब्यूरो को संदर्भित करते हुए विशेषज्ञ अंगुलि छाप दस्तावेज पर राय दिया करते हैं। चूंकि कुल संख्या बहुत बड़ी है इस प्रकाशन में मुद्रण के लिए, प्रत्येक राज्य ने संवेदनशीलता, संपत्ति के मूल्य के आधार पर खोयी/पुनर्प्राप्त ,मामलों की श्रृंखला का पता लगाने आदि कुछ महत्वपूर्ण मामलों को प्रस्तुत किया है । कई मामले और भी बड़े थे, कुछ को एक समान मामले की तर्ज़ पर फ़िल्टर किया गया है। इस अध्याय में 72 मामलों के संक्षिप्त विवरण शामिल हैं।

अध्याय- III- के.अ.छा.ब्यूरो और राज्य अ.छा.ब्यूरो की आदान-प्रदान गतिविधियां

इस अध्याय में राज्यों की संखियकी के संदर्भ मे आदान-प्रदान संबंधी गतिविधियों से संबंधित राज्यवार सांख्यिकी जैसे अ.छा. पर्ची की प्राप्त संख्या, दोषी और गिरफ्तार व्यक्तियों को स्वीकार और नामांकित, अपराध दृश्य संख्या की संख्या, बनाए गए चान्स प्रिंट्स की संख्या अवसरों की बिक्री और तुलना की गई, दस्तावेजों के मामलों की संख्या और राय शामिल है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात गिरफ्तार व्यक्तियों के अंगुलि छाप मिलान के आधार पर पिछले आपराधिक इतिहास प्रदान कर रहे हैं। वर्ष 2016 के दौरान मौके छाप के आधार पर पहचान के 484 मामलों के साथ तमिलनाडु सूची में सबसे ऊपर है। इसके बाद आंध्र प्रदेश 297, उत्तर प्रदेश 283 और पंजाब 233 दस्तावेज मामलों में सबसे ज्यादा राय दे रहे है। निम्नलिखित तालिका 2016 के दौरान राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में अखिल भारतीय अंगुलि छाप आदान-प्रदान के आंकड़े दिखाती है ।

अध्याय- IV- अ.छा. आदान-प्रदान गतिविधियों का विश्लेषण

इस अध्याय में राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में विभिन्न अंगुलि छाप संबंधित आदान-प्रदान गतिविधियों का विश्लेषण शामिल है। "क्राइम इन इंडिया (सीआईआई)" में प्रकाशित 2016 के दौरान दोषी अपराधियों की संख्या की तुलना राज्य अंगुलि छाप ब्यूरो में प्राप्त अंगुलिछाप स्लिप्स की संख्या से की जाती है जो स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि अ.छा.ब्यूरो को पुलिस स्टेशनों के सभी दोषी अपराधियों के अ.छा. पर्ची प्रस्तुत करने के लिए सुधारत्मक उपायों की शुरुआत करनी है। अपराध के दृश्य से उठाए गए मौके के आधार पर हल किए गए मामले तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और शेष राज्यों में महत्वपूर्ण हैं, यह आंकड़ा बहुत ही कम है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान महत्वपूर्ण मामलों में गिरफ्तार लोगों के अंगुलि छापों से मेल करके पिछला आपराधिक इतिहास प्रदान कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में प्रश्नपत्रों की जांच की गई।

अध्याय-V -क्षमता निर्माण

इस अध्याय में वर्ष के दौरान क्षमता निर्माण और विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबंधित जानकारी शामिल है। रा.अ.रि.ब्यूरो की सहायता से के.अ.छा.ब्यूरो भारत से और विदेशी देशों से अ.छा.ब्यूरो के पुलिस अधिकारियों / कर्मचारियों के लिए एक प्रशिक्षण / पुनश्चर्या पाठ्यक्रम आयोजित करता है।

अनुबंध:

अंगुलिछाप विज्ञान के अग्रणी, भारत में अंगुलि छाप से संबंधित कानून, XVII अखिल भारतीय अ.छा. सम्मेलन की सिफारिश, विभिन्न अंगुलि छाप ब्यूरो में तैनात किए गए कर्मचारियों, अंगुलि छापों के स्वचालन का इतिहास, प्रत्येक राज्य / संघ राज्य क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के उपकरणों की उपलब्धता, एआईबीई टॉपर्स, अंगुलि छाप विज्ञान पर कुछ अच्छी किताबें, राज्य अ.छा.ब्यूरो के संपर्क विवरण अनुबंध मे शामिल किया गया हैं।